About

नमस्कार. मेरा  नाम  माया  है. जब  भी  लगता  है  कुछ  गलत  हो  रहा  हैमन  वेदना  से  भर  जाता  है, चीत्कार  कर  उठता  है. इसे  दबाने की  कोशिश  करती  हूँ. पर  यह  चीत्कार, यह  वेदना  कब आहबन  कर पन्नों पर  बिखर  जाती  है, अहसास  भी नहीं  होता. बाद  में  जब  कभी  कोई  पन्ना उठा  कर  देखती  हूँ  तब  पता  चलता  है  कोई  कविता  बन  गई  है  या  कोई  अफ़साना. इसीलिए  रचनाकार  होने  का  दावा  नहीं करती. न  शब्द  ज्ञान  है , न  छंद  ज्ञान. लेखन  के  नियम  नहीं  जानती – बस  मन  बोल  उठता  है – मन  तो  ईश्वर  है  न. ईश्वर  तो  हम  सभी  के अन्दर  बोलता  है – कुछ  अनसुनी  कर  देते  हैं, जो  सुन  लेते  हैं  वे  रचनाकार  कहलाते  हैं. 

वह  परम  रचनाकार  तो  सदा  सही  बोलता  है. पर  अगर  कभी  मेरे  सुनने  में  कभी  गलती  हो  जाएतो  क्षमा  चाहूँगी.

धन्यवाद.